हसरत
हसरत
बस एक हसरत है,
वो पूरी कर दें भगवान
हारी में करके जतन,
अब तू ही कर दें एहसान
तेरी ही बनाई इस दुनिया से,
मन मेरा गया है ऊब
लेकिन जिनने मुझे जीने नहीं दिया,
उनको दी तूने खुशियां खुब
उनमें और मुझमें फर्क ही क्या है,
हम सब है तेरी संतान
फिर भी पग पग पे इनसे क्यूं करवाई मेरी परीक्षा,
सबकी तरह तूने भी तो डाली है मुझमें जान
समझ गई मैं ये लेख विधाता तेरा ही लिखा है,
अब तेरे मिटाएं से ही ये मिटेगा
हिम्मत यही सोचकर मैं खुद को देती रही,
एक दिन मेरा भी अच्छा वक्त आएगा
लेकिन फिर भी तू जिंद पर अडा रहा,
बता तुम क्यूं है मुझसे खफा
तुझे पूज पूजकर में हारी लेकिन,
ये पूजा है तेरे लिए आखरी दफा
अभी भी तेरे लिये मेरे मन में आस्था है बाकि,
तभी तो आई हु में तेरे द्वार
दें शक्ति मुझे कर मेरे संकट को दूर
करदें तू मेरा भी उद्धार
हार जाए मुझसे निराशा नसीबा बदल दें,
तू मेरा ऐसा हो जाए सब हैरान
वो राह दिखा जीने कि सर उनका झुक जाए,
जो करते है अब भी सितम हमपर बनके हैवान।
