हर रोज परीक्षा होती है
हर रोज परीक्षा होती है
नहीं है मिलती मंजिल यारों
नहीं सफलता मिलती है।
जीवन ऐसा मिले मनुज को
हर रोज़ परीक्षा होती है।।
किसको सेज मिला फूलों का
कहां ताज मिलता सबको
कहां महल का सुख नसीब है
दर्द बहुत मिलता सबको
कांटों के बिस्तर पर लेटे ही
उम्र गुजरती जाती है
जीवन ऐसा मिला मनुज को
हर रोज़ परीक्षा होती है।।
जीवन के बढ़ती राहों पर
कदम कदम कांटे बिखरे
पथरीले राहों पर चलकर
लहुलुहान पग से गुज़रे
पग-छालों के साथ बढ़ा चल
मंजिल तुम्हें बुलाती है
जीवन ऐसा बना मनुज का
हर रोज़ परीक्षा होती है।।
नियम अनूठा इस जीवन का
कहीं धूप कहीं छाया है
चूम ही लेती कदम सफलता
तनिक नहीं घबराया है
संघर्षों से तपकर जीवन
अमिट कहानी लिखती है
जीवन ऐसा बना मनुज का
हर रोज़ परीक्षा होती है।।
दुर्दिन के आते जीवन में
अपना भी ठुकराता है
समय चक्र का पहिया घूमें
जीवन-रंग दिखाता है
आशाओं का दीप जलाओ
साहस अन्दर भर देती है
जीवन ऐसा बना मनुज का
हर रोज़ परीक्षा होती है।।
पंखों में साहस भरकर ही
सभी परिंदे उड़ते हैं
जिसने भी परवाज़ लगाई
नभ वो ही छू पाता है
धन्य मनुज उसके गौरव को
ये दुनिया भी गाती है
जीवन ऐसा बना मनुज का
हर रोज़ परीक्षा होती है।।
वक्त बहुत अनमोल है रे मन
साथ समय के तुम चलना
क्या क्या खेल दिखाया है रे
संभल संभल करके चलना
नहीं जो संभला देख समय संग
किस्मत उसे रुलाती है
जीवन ऐसा बना मनुज का
हर रोज़ परीक्षा होती है।।
