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Vimla Jain

Tragedy

4  

Vimla Jain

Tragedy

हर इंसान की अधूरी कहानी

हर इंसान की अधूरी कहानी

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यह जिंदगी है जनाब

भले हम कितनी भी लंबी जिंदगी जी लें

हमारी कहानी कभी पूरी होती ही नहीं।

पति-पत्नी संतान दुनियादारी और जवाबदारी निभाते निभाते

जो हम मरण शैया पर भी पड़े हो तब भी जो पति होगा

वह पत्नी की और परिवार की चिंता करता होगा।

मेरे जाने के बाद इनका क्या होगा।

 इससे मेरे को थोड़ी ज्यादा जिंदगी मिल जाती तो मैं यह कर लेता वह कर लेता।

 इसी तरह पत्नी मेरे जाने के बाद मेरे पति का क्या होगा।

 मेरे बच्चों का क्या होगा।

 इसी कशमकश में जिंदगी पूरी हो जाती है। मगर कहानी अधूरी रह जाती है। 

जो कभी पूरी होती ही नहीं।

हर गृहिणी की भी यही कहानी।

 सुबह से रात तक काम निपटाने के बाद जब सोने जाए ।

तो उसे कल की चिंता सताए।

 यह काम आज अधूरा रह गया वह काम आज अधूरा रह गया।

 इसे कल पूरा करूंगी वह कल कभी आये ही नहीं और कहानी अधूरी रह जाए।

क्या ख्याल है मेरे दोस्तों।

 क्या आप मेरे साथ सहमत है।

 जिंदगी में सबके ख्वाब अधूरे ही रह जाते हैं।

 पूरे करने जाते हैं तो कुछ होते हैं और कुछ अधूरे ही रह जाते हैं। क्योंकि हमारी ख्वाहिशें बहुत है और ख्वाब उनके सामने छोटे पड़ जाते हैं।

क्योंकि इंसान की फितरत ही ऐसी है जो मिला है उससे ज्यादा ही उसको चाहिए होता है।

 और वह संतोष ना कर उसकी तरफ और ज्यादा ख्वाहिश करता है

और उसकी ख्वाहिशें जिंदगी भर अधूरी रह जाती है।



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