Rohit Kumar Yadav
Children
होली आई होली आई
गुलाल की झोली लायी
पिचकारी में रंग भर कर
बच्चों की टोली आई
खूब हुड़दंग मचायी
नहीं किसी से रूसवाई
आपस में सब भाई-भाई
गुजिया नमकीन और ठंडाई।
***बेटी***
अमर शहीद
***होली***
फागुन का रंग
***वीर जवान च...
***अपना हिन्द...
***सवाल***
***भारत***
***बसंत का बय...
जिक्र हो होली का महफिल में, तो नवोदय का नाम अपने आप ही आता है। जिक्र हो होली का महफिल में, तो नवोदय का नाम अपने आप ही आता है।
माँ से सुन तारीफ इतनी मेरा मन कुछ बदला, सोचा खा लेती हूँ माना बहुत है कड़वा। माँ से सुन तारीफ इतनी मेरा मन कुछ बदला, सोचा खा लेती हूँ माना बहुत है कड़व...
एक पिता ही देते हैं साथ, जब जिंदगी भर चलने की होती है बात ! एक पिता ही देते हैं साथ, जब जिंदगी भर चलने की होती है बात !
इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षर से अंकित नमक संघर्ष की वो यात्रा दांडी की थी, इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षर से अंकित नमक संघर्ष की वो यात्रा दांडी की थी,
तेरे हर भाव को सहकर मैं दिल ही दिल में रोता हूँ। तू मुझ में यूँ समाया है की खुद क तेरे हर भाव को सहकर मैं दिल ही दिल में रोता हूँ। तू मुझ में यूँ समाया है...
परिचय पाकर उन दोनों का पल में बालक हुआ मगन परिचय पाकर उन दोनों का पल में बालक हुआ मगन
वो यादें हैं, जो तब रुलाती थी अब हंसाती हैं ये यादें हैं, जो याद रह जाती हैं। वो यादें हैं, जो तब रुलाती थी अब हंसाती हैं ये यादें हैं, जो याद रह जाती हैं।
स्कूल का वो पहला दिन स्कूल का वो पहला दिन
आये जो कोई आँच देश पर हम अपनी जान लुटा देंगे आये जो कोई आँच देश पर हम अपनी जान लुटा देंगे
पकड़े जाने पर, मम्मी की पड़ती डांट ज़ोरदार, साथ में फ्री के मिलते थे पकड़े जाने पर, मम्मी की पड़ती डांट ज़ोरदार, साथ में फ्री के...
बिन मेहनत के हासिल तख़्त-ओ-ताज नहीं होते। बिन मेहनत के हासिल तख़्त-ओ-ताज नहीं होते।
कैसे बिठायें कंप्यूटर के समक्ष, एकाग्रता बच्चों की खो रही है कैसे बिठायें कंप्यूटर के समक्ष, एकाग्रता बच्चों की खो रही है
जो ऊपर गतिमय भीतर शांत रहेगा वहीं समंदर कहलाएगा । जो ऊपर गतिमय भीतर शांत रहेगा वहीं समंदर कहलाएगा ।
तूने अपना संसार बसाया फिर अपना परिवार बढ़ाया अपनी खुदगर्जी के ख़ातिर तूने मेरा खून बहा तूने अपना संसार बसाया फिर अपना परिवार बढ़ाया अपनी खुदगर्जी के ख़ातिर तूने...
जिंदगी के इस सफर में मैंने उससे सीखा है। जिंदगी के इस सफर में मैंने उससे सीखा है।
फिर से उन पर बारिश की बूंदों को उड़ेलना है चिरपरिचित अंदाज़ सावन का। फिर से उन पर बारिश की बूंदों को उड़ेलना है चिरपरिचित अंदाज़ सावन का।
कहाँ गया गुरु चरण छूने का भाव कहाँ गया वो गुरु के प्रति मान सम्मान श्रद्धा का भाव कहाँ गया गुरु चरण छूने का भाव कहाँ गया वो गुरु के प्रति मान सम्मान श्रद्धा का...
भटक कर ज़िन्दगी की हर सड़क नाप डाली है चिलचिलाती धूप हो या बरसात की बौछारें भटक कर ज़िन्दगी की हर सड़क नाप डाली है चिलचिलाती धूप हो या बरसात की बौछारें
चलो ना ! ले चलते हैं अपने साथ प्यारा-सा ये बादल। चलो ना ! ले चलते हैं अपने साथ प्यारा-सा ये बादल।
बचपन के वो दिन बचपन के वो दिन