Rohit Kumar Yadav
Children
होली आई होली आई
गुलाल की झोली लायी
पिचकारी में रंग भर कर
बच्चों की टोली आई
खूब हुड़दंग मचायी
नहीं किसी से रूसवाई
आपस में सब भाई-भाई
गुजिया नमकीन और ठंडाई।
***बेटी***
अमर शहीद
***होली***
फागुन का रंग
***वीर जवान च...
***अपना हिन्द...
***सवाल***
***भारत***
***बसंत का बय...
क्या खूब थीं वो स्कूल की यादें जब हम बने थे चार दोस्त। क्या खूब थीं वो स्कूल की यादें जब हम बने थे चार दोस्त।
वो ढाल बनकर इनसे लड़ जाती है ! बेटियां संपन्नता का प्रतीक होती है! वो ढाल बनकर इनसे लड़ जाती है ! बेटियां संपन्नता का प्रतीक होती है!
आशीर्वाद से मेरे पापा के, ये कानून मिली है मुझे विरासत में... आशीर्वाद से मेरे पापा के, ये कानून मिली है मुझे विरासत में...
बीते हुए वो बचपन के दिन बहुत याद आते हैं। बीते हुए वो बचपन के दिन बहुत याद आते हैं।
जिन बच्चों के घर भी तो, नाममात्र का घर ही रहता है.....!! जिन बच्चों के घर भी तो, नाममात्र का घर ही रहता है.....!!
बचपन में दादी के पास ही हम रहते थे जीवन का अमूल्य ज्ञान दादी से ही पाते थे बचपन में दादी के पास ही हम रहते थे जीवन का अमूल्य ज्ञान दादी से ही पाते थे
इसीलिए तो सबके मन को भाती गौरैया। इसीलिए तो सबके मन को भाती गौरैया।
मगर अफसोस है फोटो अब ना रही। खाली यादों में बसी फोटो रह गई। मगर अफसोस है फोटो अब ना रही। खाली यादों में बसी फोटो रह गई।
आइस्क्रीम भी तेरी मेरी जिंदगी के सच में स्वाद भी हम को कहती है। आइस्क्रीम भी तेरी मेरी जिंदगी के सच में स्वाद भी हम को कहती है।
चाहे जो भी हो जाए, प्यार कभी नहीं मरता, दिल के अंदर सदा उसका निवास रहता है। चाहे जो भी हो जाए, प्यार कभी नहीं मरता, दिल के अंदर सदा उसका निवास रहता है।
देश के जांबाज देशभक्तों आज एक शाम तुम्हारे नाम है।। देश के जांबाज देशभक्तों आज एक शाम तुम्हारे नाम है।।
सबके चहेते हम हुआ करते थे, बच्चे समझकर गलतियों पर माफ सब किया करते थे। सबके चहेते हम हुआ करते थे, बच्चे समझकर गलतियों पर माफ सब किया करते थे।
तोह मुझे अपने पापा की याद दिल देती है काश मेरे पापा भी होते। तोह मुझे अपने पापा की याद दिल देती है काश मेरे पापा भी होते।
छान-छान कर पीओ प्यारे, इसलिए तो पास बुलाता है।। छान-छान कर पीओ प्यारे, इसलिए तो पास बुलाता है।।
गर्मी में कानों को ढककर बाहर निकलना मामा जी ने ये बात हमें सिखाई। गर्मी में कानों को ढककर बाहर निकलना मामा जी ने ये बात हमें सिखाई।
पिचकारी बन बादल वर्षा होगी ये रचना कर डाली पिचकारी बन बादल वर्षा होगी ये रचना कर डाली
चेहरे पर भाव लाते ऐसे जैसे सबसे उनकी पहचान चेहरे पर भाव लाते ऐसे जैसे सबसे उनकी पहचान
मदारी ने फिर डुगडुगी बजायी बन्दर से फिर पलटी लगवाई। मदारी ने फिर डुगडुगी बजायी बन्दर से फिर पलटी लगवाई।
चलते -चलते जब तुम थक़ जाओ, किसी घने पेड़ की छांव के बैठना। चलते -चलते जब तुम थक़ जाओ, किसी घने पेड़ की छांव के बैठना।
शीत ग्रीष्म वृष्टि को क्रम से, एक एक कर लाता कौन ? शीत ग्रीष्म वृष्टि को क्रम से, एक एक कर लाता कौन ?