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Vikram Kumar

Abstract

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Vikram Kumar

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होली आई है

होली आई है

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राधा के संग गोपियों की टोली आई है

खुशियों के रंग लेके फिर से होली आई है


भीने गुलाल से महक उठा है ये चमन

पिचकारी तान राधा पर खड़े हुए मोहन


मैया यशोदा हाथ में, ले रोली आई है

खुशियों के रंग लेके फिर से होली आई है


हर्ष और उल्लास में, अंबर रहा है झूम

पावन धरा पर ब्रज की देखो मच रही है धूम


आनंद से जैसे भरी एक झोली आई है

खुशियों के रंग लेके फिर से होली आई है


मन के भाव सबके हैं अनूप ये देखो

रंग में डूबे सभी का रुप ये देखो


रंगीनियों को साथ ले रंगोली आई है

खुशियों के रंग लेके फिर से होली आई है


यूं ही खुशियां सबकी जिंदगी में समाई हो

सबको मन से होली की बहुत बधाई हो


मन के मिठास में घुली सी बोली आई है

खुशियों के रंग लेके फिर से होली आई है।


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