हो भारती तो भारत से प्रेम करो
हो भारती तो भारत से प्रेम करो
जन्म लिया इस धरा पर,
भारत की महान भूमि पर,
कर्म की इस दुनियां में,
उलझ गए अमानवीयता में।
हिन्दू होकर हिन्दू की आलोचना करते रहे,
मुस्लिम होकर मुस्लिम विरोधी बनते रहे,
जातिवाद की नारों में नरसंहार तुम करते गए,
जवानी की जोश में राक्षसी कर्म करते गए।
औरों के जीवन को रंगहीन बनाते रहे,
औरों की बहू-बेटियों की जीवन नर्क बनाते रहे,
आयी जब आखिरी क्षण तब ईश वंदन करते हो,
उस दौर को याद करो जब बेबस-लाचार पर अत्याचार करते हो।
अपने आपको भारत का सपूत कहते हो,
भारती होने की कहां बोल तुम रखते हो,
हो भारती तो भारत से प्रेम करो,
जातिवाद-धर्मवाद को दूर करो।
नित नये-नये विचार-धर्म का त्याग करो,
कभी कुछ आधार समाज बाँटना बंद करो,
भारत की भूमि ने दिया आश्रय तुमको,
इस धरा की पवित्रता ने वजूद दिया तुमको।
सबको साथ ले चलो एक नाव की सवारी,
जैसे बागों में फूलों की हो एक क्यारी ,
मानवता के आगे ना कोई जाति ना कोई धर्म,
मानव हो मानव रहो यही कहता सबका धर्म।
