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Dr.Narendra kumar verma

Inspirational

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Dr.Narendra kumar verma

Inspirational

हनुमान चालीसा

हनुमान चालीसा

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जय हनुमान ज्ञान गुण सागर !

जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।


रामदूत अतुलित बल धामा !

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।।


महावीर विक्रम बजरंगी !

कुमति निवार सुमति के संगी।।


कंचन वरन विराज सुवेसा !

कानन कुंडल कुंचित केसा।।


हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै !

कांधे मूंज जनेऊ साजै।।


शंकर सुवन केसरी नंदन !

तेज प्रताप महा जगबंदन।।


विद्यावान गुणी अति चातुर !

राम काज करिबे को आतुर।।


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया !

राम लखन सीता मन बसिया।।


सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा !

विकट रूप धरि लंक जरावा।।


भीम रूप धरि असुर सँहारे !

रामचंद्र के काज सँवारे।।


लाय संजीवन लखन जियाये!

श्री रघुवीर हरषि उर लाये।।


रघुपति किन्ही बहुत बड़ाई !

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।


सहस बदन तुम्हरो यश गावै !

अस कहि श्रीपति कंठ लगावै।।


सनकादिक ब्राह्मदि मुनीशा !

नारद शारद सहित अहीसा।।


जम कुबेर दिकपाल जंहा ते !

कबि कोबिद कहि सके कंहा ते।।


तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा !

राम मिलाय राजपद दीन्हा।।


तुम्हरो मंत्र विभीषण माना !

लंकेश्वर भये सब जग जाना।।


जुग सहस्त्र जोजन पर भानु !

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही !

जलधि लाँधि गए अचरज नही।।


दुर्गम काज जगत के जेते !

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।


राम दुआरे तुम रखवारे !

होत न आज्ञा बिन पैसारे।।


सब सुख लहै तुम्हारी सरना !

तुम रक्षक काहू को डरना।।


आपन तेज सम्हारो आपै !

तीनो लोक हांपते कापे।।


भूत पिशाच निकट नहीं आवे !

महावीर जब नाम सुनावे।।


नासे रोग हरे सब पीरा !

जपत निरंतर हनुमत बीरा।।


संकट ते हनुमान छुड़ावै !

मन क्रम वचन ध्यान जो लावे।।


सब पर राम तपस्वी राजा !

तिनके काज सकल तुम साजा।।


और मनोरथ जो कोई लावे !

सोई अमित जीवन फल पावै।।


चारों जुग परताप तुम्हारा !

है प्रसिद्ध जगत उजियारा।।


साधु संत के तुम रखवारे !

असुर निकंदन राम दुलारे।।


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता !

अस वर दीन जानकी माता।।


राम रसायन तुम्हारे पासा !

सदा रहो रघुपति के दासा।।


तुम्हरे भजन राम को पावै !

जनम जनम के दुख बिसरावै।।


अंत काल रघुबर पुर जाई !

जहां जन्म हरि भक्त कहाई।।


और देवता चित न धरई !

हनुमत सेइ सर्व सुख करई।।


संकट कटे मिटे सब पीरा !

जो सुमिरे हनुमत बलबीरा।।


जय जय जय हनुमान गोसाई !

कृपा करहु गुरुदेव की नाई।।


जो शत बार पाठ कर कोई !

छुटहि बंदि महासुख होई।।


जो यह पढ़े हनुमान चालीसा !

होय सिद्धि साखी गौरीसा।।


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