हमसाया
हमसाया
वह लड़की
सड़क पर
जा रही
थी अकेली
बन गई
उसके लिए
यह एक
गूढ़ पहेली
जाने किसने
उसकी
जान बचाई
उसके कुछ
समझ
ना आई
घर जाकर
पूछा माँ से
माँ
सुलझाओ
यह पहेली
तुम कहती हो
बनकर
रहती हो
माँ तुम
मेरी सहेली
सुख-दुःख
तुम मेरे
बाँटती हो
अदृश्य हो
जान मेरी
बचाती हो
बनकर परी
मेरे जीवन
में आई तुम
धरा पर
मेरे मन
को भाई तुम
अब भी
मेरा प्रश्न
यही है
हाथ जोड़
मेरी विनती
यही है
हर पल
कैसे संग
रह लेती हो
कैसे मेरे
सब दुख
हर लेती हो
