STORYMIRROR

Anuradha Negi

Inspirational

4  

Anuradha Negi

Inspirational

हमने देखा है सुना है

हमने देखा है सुना है

1 min
402

जिसने एक टुकड़ा रोटी के लिए

मजबूत पत्थर एक एक तोड़ा था ,

जिसने गरीबी भुखमरी के अलावा

और किसी से नाता ना जोड़ा था।

मात्र चौदह वर्ष की उम्र में ही 

जिसने घर बार अपना छोड़ा था ,

सब भाई बहन , और माता पिता

इन सबसे दूर शहर में दौड़ा था।

कभी लॉटरी टिकट को बेचना हुआ

तो कभी भट्टियों का काम पकड़ा था,

सर्दियों के मौसम और ४ रोटी डिब्बे में

प्रातः ४ से रात १० का सफर तगड़ा था।

पीछे पड़ते थे जब कुत्ते उन गलियों के 

वो रोटी का डिब्बा खाली हो जाता था,

उन्हें चुप कराने बस लोगों को ना जगाने 

बस यही प्रार्थना बदले में वो करता था।

आज भी कड़ी मेहनत सफर जारी है 

मेरे पिता पर जिम्मेदारियां बड़ी भारी है 

कोशिशें की है उन्हें अब खुश रखने की 

खुशियां डेरा लेती नहीं विपदायें सारी हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational