STORYMIRROR

Shyam Kunvar Bharti

Romance

3  

Shyam Kunvar Bharti

Romance

हमी से छुपाता रहा

हमी से छुपाता रहा

1 min
421

डाल मेरे ज़ख्मों पर नमक वो मुस्कुराता रहा

मेरी आह परवाह नहीं वो खिलखिलाता रहा

मिले हर खुशी उनको थी चाहत मेरी

देख मेरी तड़प वो गुनगुनाता रहा था

इकरार या इंकार कुछ कहा ही नहीं

दिल समंदर ज्वार प्यार वो उठाता रहा

पकड़ हाथ मेरा लड़ लिया तूफानों से बन

हमसफर मंज़िल मुझे भटकाता रहा


कबूल कर देखो इश्क नज़ारे बदल जाएंगे 

ठुकरा मोहब्बत मेरी मुझे तड़पाता रहा

लूटा दूँगा दिल की दौलत तुम्हारे लिए

हसरतों के दिये फूंक मार बुझाता रहा

मेरा हर हुस्नो शबाब तुम्हारे लिए है

थाम गैर दामन मुझे वो भरमाता रहा

हसीन होगा सफर साथ चलकर तो देखो

दोस्त बनकर सरे राह कांटे बिछाता रहा

 कर दूँगा रौशन दुनिया तेरी मैं जुगनू सही

तोड़कर दिल आँसू हमी से छुपाता रहा ।।  



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance