हमें पता ही न चला
हमें पता ही न चला
मेरे हाथ की लकीरें ,
कब बदल गई पता ही न चला,
किस्मत में क्या लिखा था क्या हो गया,
इसका हमें पता ही न चला,
लोगों ने ताने मारे धिक्कारा,
कुछ ना कर पाएगा तू जीवन में,
सुन सुनकर ये सभी बातें थक गया था,
चलते चलते राहों में कहीं रुक गया था,
मन में ख्यालों का समंदर बह रहा था,
कब वो समंदर आंखों से बह निकला,
इसका हमें पता ही न चला,
एक छोटी सी आशा लौ,
जल रही थी कहीं दिल में,
आशा की लौ ने जीवन बदल दिया,
जो लोग कभी धिक्काराते थे मुझे,
आज वह मुझे सलाम करते हैं,
इतना सब कैसे बदल गया,
इसका हमें पता ही ना चला,
आज भी जब बीती बातों को याद करता हूँ,
सोच कर खुश हो जाता हूँ,
जो हुआ चलो अच्छे के लिए हुआ,
अगर वो मुझे धिक्काराते नहीं,
तो यहाँ कुछ ना बदलता,
कितना कुछ बदल गया,
हमें इसका पता ही ना चला रहे।
