STORYMIRROR

Manjul Manzar Lucknowi

Inspirational

4  

Manjul Manzar Lucknowi

Inspirational

हमारी मातृभाषा है

हमारी मातृभाषा है

1 min
66

जो हिन्दी से हैं शरमाते हमे उनसे निराशा है।

समूचे विश्व में सम्मान हो इतनी ही आशा है।


इसे बोलें इसे गायें इसे ओढ़ें बिछायें हम,

मिली है कोख से माँ की हमारी मातृभाषा है। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational