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Shipra Verma

Abstract


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Shipra Verma

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हम उनकी तस्वीर हैं

हम उनकी तस्वीर हैं

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धरती पर जब उतरे थे हम

प्रथम माता के गर्भ में

उसी क्षण से उनकी प्रेरणा

समाने लगी अस्तित्व में


आँखे खोली, जग से पहले

प्यारे पिता की उंगली पकड़ी

उनकी शिक्षा, उनकी प्रेरणा

नस नस में मेरे है जकड़ी


बड़े हुए जग में अपना नाम हुआ

तनिक भी मन मे संशय नहीं हुआ

नाम मेरा सब ले कर प्रशंसा भले करे

पर यह माता पिता ही मुझमे है भरे


सब गुण सारा व्यवहार उन्हीं से सीखा

माता पिता सखा गुरु वोही हैं

वो इस धरा पर नहीं रहे अब लेकिन

मुझमें तो केवल वो ही भरें है


जीवन के हर क्षण को मेरे

प्रेरित करते रहते हैं माता पिता

कितनी भी विपत्ति आ जाये

साथ मेरे रहते हैं माता पिता


नैतिकता के मार्ग पर चलना

हर हाल में उनसे ही सीखा

इसीलिए कभी आज तक भी

झुका न शर्म से मेरा शीशा


जब तक मैं ज़िंदा हूँ प्रेरणा

लेती रहूंगी माता पिता से हरदम

ऐसे पालक हैं , अब ईश्वर संग

संभाले रखेंगे मुझको हरदम।



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