STORYMIRROR

aazam nayyar

Abstract Fantasy Children

4  

aazam nayyar

Abstract Fantasy Children

हम सफ़र

हम सफ़र

1 min
382

ग़ज़ल 


वो बने जो मेरा चेहरा हम सफ़र 

प्यार का हो रोज़ चर्चा हम सफ़र  


साथ जिसके था सफ़र मेरा कटा 

याद आये वो हर लम्हा हम सफ़र


तू बना अपनें सफ़र का ही साथी 

कट रहा है व़क्त तन्हा हम सफ़र  


छोड़ कर वो बीच सफ़र में ही गया 

बेवफ़ा वो देख निकला हम सफ़र 


हाले दिल मैं भी सुनाता उसको ही 

जीस्त में मेरी जो होता हम सफ़र


आशना भी तो नहीं कोई यहाँ 

है यहाँ तो अपना रस्ता हम सफ़र 


हिज्र में उसकी न यूं जलता आज़म 

वो अगर बनता जो मेरा हम सफ़र।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract