STORYMIRROR

Shailaja Bhattad

Abstract

1  

Shailaja Bhattad

Abstract

हकीकत

हकीकत

1 min
65

चीज कहकर तस्वीर लेने से,

बिखरी जिंदगी संवरती नहीं।

क्षण भर को बत्तीसी दिख तो जाती है। 

लेकिन हकीकत कभी बदलती नहीं। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract