VIVEK AHUJA
Classics
कभी होती थी देश में,
भाषा हिंदी प्रधान।
धीरे-धीरे खो रही,
अपनी यह पहचान।
कदम कदम पर हो रहा,
अब इसका अपमान।
जगह जगह हो गया,
कम इसका सम्मान।
डिजिटल युग में हो रहा,
नहीं इसका उत्थान।
आंग्ल भाषा सबको प्रिय,
इसका कौन करे गुणगान।
माँ
होली का हुड़द...
हिंदी
हम सँभल गए ,पता नहीं है आजकल।। पर ये भी कोई ख़ता नहीं है आजकल।। हम सँभल गए ,पता नहीं है आजकल।। पर ये भी कोई ख़ता नहीं है आजकल।।
प्यार से रिश्ता जोड़ लो, तुम प्यार की भाषा को जान लो।। प्यार से रिश्ता जोड़ लो, तुम प्यार की भाषा को जान लो।।
कुछ वक्त मोबाइल छोडकर जिंदगी जिओ उनके संग शरबती प्यालों में ! कुछ वक्त मोबाइल छोडकर जिंदगी जिओ उनके संग शरबती प्यालों में !
दो कदम ही सही तुम भी, मेरे संग चल कर देख लो ।। दो कदम ही सही तुम भी, मेरे संग चल कर देख लो ।।
बीती यादों की किताब में नए सुखद किस्से लिखूँगी। बीती यादों की किताब में नए सुखद किस्से लिखूँगी।
खड़ा जहाँ हूँ आज हम सभी अभी जहाँ इन मित्रता ने है वह मुकाम दिलाई।। खड़ा जहाँ हूँ आज हम सभी अभी जहाँ इन मित्रता ने है वह मुकाम दिलाई।।
वो सियाही कितनी खूबसुरत होगी जब तेरे महंदी रचे हाथो से नाम तेरा मेरा साथ में लिखा जाय वो सियाही कितनी खूबसुरत होगी जब तेरे महंदी रचे हाथो से नाम तेरा मेरा साथ में...
छोटी सी है यह ज़िंदगी खुल के जियो और प्रयत्न करते रहो अपनी आशाएं को पुरा करने के लिए। छोटी सी है यह ज़िंदगी खुल के जियो और प्रयत्न करते रहो अपनी आशाएं को पुरा करने...
रुक जाते हैं तुम्हें देख कर तुम नए नए से लगते हो।। रुक जाते हैं तुम्हें देख कर तुम नए नए से लगते हो।।
स्कूल टाइम मस्ती भरा टाइम, दोस्तों के साथ शरारतों के सागर में गोते लगाने का टाइम। स्कूल टाइम मस्ती भरा टाइम, दोस्तों के साथ शरारतों के सागर में गोते लगाने का ट...
मोहब्बत का महीना आया मोहब्बत भूल अप्रैल फूल बनाया। मोहब्बत का महीना आया मोहब्बत भूल अप्रैल फूल बनाया।
रोज़ ही तो तुझे लिखती हूँ तुझे में पन्नों पर फिर क्यूँ तू रोज़ याद आता है। रोज़ ही तो तुझे लिखती हूँ तुझे में पन्नों पर फिर क्यूँ तू रोज़ याद आता है।
अपनी इसी पावन धरा पे, धर्म का संचार हो। अपनी इसी पावन धरा पे, धर्म का संचार हो।
लगता है हम भूल रहे हैं, चलो देेखते हैं, चलो देखते हैं।। लगता है हम भूल रहे हैं, चलो देेखते हैं, चलो देखते हैं।।
साथ चलते रहे आखिर तक, लेकिन आप में कभी ना मिले। साथ चलते रहे आखिर तक, लेकिन आप में कभी ना मिले।
भटकते- भटकते ही सही लेकिन एक दिन अपनी मंज़िल जरूर पा जाऊँगा। भटकते- भटकते ही सही लेकिन एक दिन अपनी मंज़िल जरूर पा जाऊँगा।
ये शिला पाषाण चीखें काट देती धार कोमल।। ये शिला पाषाण चीखें काट देती धार कोमल।।
माना तुझे मोहबत नहीं है मुझसे पर कभी नफरत नहीं करना। माना तुझे मोहबत नहीं है मुझसे पर कभी नफरत नहीं करना।
यहीं पले थे राम कृष्ण जन जन के मानस पर जो छाए।। यहीं पले थे राम कृष्ण जन जन के मानस पर जो छाए।।
'सुओम' तो दीवाना है आदत का। अभी एक नई पहचान बाकी है।। 'सुओम' तो दीवाना है आदत का। अभी एक नई पहचान बाकी है।।