हालात
हालात
हालात तेरे चाहे कितने बिगड़े हो
जिंदगी के चाहे कितने टुकड़े हो
तू अपने आप में हार न मानेगा,
क्योंकि तुम भी जिद पे अड़े हो
फूल नही,एक शूल है,बबूल का,
सीना फाड़ देगा,हर समस्या का,
समस्या चाहे कितनी जकड़े हो
पर तुम भी साहसी बहुत बड़े हो
क्या तम,दीप रस्ता रोक सकता?
चाहे जीवन में कितने घने अंधेरे हो
भीतर दीप जला,आत्मविश्वास का,
क्योंकि तुम जलते सूर्य के टुकड़े हो
जिंदगी में कितने उदास मुखड़े हो
गर तुम खुद को पूरा समझते हो
तुम आसमाँ तक झुका सकते हो
यदि तुम इरादे नभ से ऊंचे रखते हो
हालात चाहे कितने ही बिगड़े हो
तुम भी बालाजी के भक्त तगड़े हो
हर समस्या काटना,भक्ति खड्ग से,
इससे आत्मविश्वास अम्बर जैसे हो
मीरा ने भक्ति से वो कर दिखलाया
हर हालात में कृष्ण समर्पण बताया
भक्ति हो तो प्रह्लाद,मीरा के जैसे हो
जीवन हो तो शूलों में गुलाब जैसे हो
हालात तेरे चाहे कितने बिगड़े हो
जीवन-सँघर्ष में सदा तुम खड़े हो
हर हालात में तुम दीपक ऐसे हो
मिटाना तम,तुम रोशनी किरणे हो
हर हाल,में तुम पाक आईने से हो
जैसे भीतर हो,वैसे तुम बाहर हो
कभी न बदलना,स्व प्राकृतिकता
हर हाल में अपनी प्रतिकृति से हो
कभी न हारना तू साखी खुद से,
जीवन मे चाहे कितने गम लहरें हो
बनना ऐसे, जिसमे तटस्थ लहरें हो
जीतेगा, तू जब भीतर शांत लहरें हो।
