Upendra Pratap SIngh
Tragedy
१-
हवाई अड्डा-
अश्रुपूरित माँ से
शीशे की दूरी
२-
प्रसूति कक्ष-
बेटी को दुलराती
सजल नैन
३-
श्रावण मास-
आर्द्र नेत्र निहारे
भाई की वर्दी
४-
शयनकक्ष-
सूर्मे की सलाई से
टपके आँसू
५-
पुष्कर मेला-
नम आँखों थमाता
बैल की रस्सी
तेरी याद आयी ...
माँ के नाम गी...
हाइकु
हाइकु (आँसू)
ढाई आखर प्रेम
सब पुनः ठीक ह...
सपनों में मेरी “कविता” आयी मलिन ,शृंगार रहित चुप -चाप खड़ी मायूस पड़ी। सपनों में मेरी “कविता” आयी मलिन ,शृंगार रहित चुप -चाप खड़ी मायूस पड़ी।
मैं दिल से मजबूर हूँ अपने और वो दुनियादारी से। मैं दिल से मजबूर हूँ अपने और वो दुनियादारी से।
अब आयी चुनाव की भूख है, युवा बना बेवकूफ है। धर्म को मुद्दा हम बनाएंगे, युवाओं का वोट अब आयी चुनाव की भूख है, युवा बना बेवकूफ है। धर्म को मुद्दा हम बनाएंगे, ...
आज फिर पंखे से झूल गई वह मासूम लड़की जिंदगी से हारकर निरंतर झूल रही है। आज फिर पंखे से झूल गई वह मासूम लड़की जिंदगी से हारकर निरंतर झूल रही ह...
गांव रहे कहाँ कोई तो बताये ? आधे गांव तो शहर लील गये । गांव रहे कहाँ कोई तो बताये ? आधे गांव तो शहर लील गये ।
देख-देख चिठ्ठी को कई-कई बार छू कर चिठ्ठी को अनपढ भी “एहसासों” को पढ़ लेते थे...!! देख-देख चिठ्ठी को कई-कई बार छू कर चिठ्ठी को अनपढ भी “एहसासों” को पढ़ लेते थे...
पहाड़ खाली हो रहे हैं पलायन की विपदा भारी है। पहाड़ खाली हो रहे हैं पलायन की विपदा भारी है।
मुलजिम हो तुम अपने ही तबके की उन तमाम नवजातों की. मुलजिम हो तुम अपने ही तबके की उन तमाम नवजातों की.
हवाओं में लिपटी है खुशियां कहीं कहीं घुटन में बंद कोई काया है। हवाओं में लिपटी है खुशियां कहीं कहीं घुटन में बंद कोई काया है।
तय किया लोमड़ी नहीं छोड़ेगी चाहे जितने उपर लटके दूसरों के लिए खट्टे नहीं छोड़ेगी तय किया लोमड़ी नहीं छोड़ेगी चाहे जितने उपर लटके दूसरों के लिए खट्टे ...
तजुर्बा जिंदगी का खत्म होगा मौत पर इस तरह जिएंगे के मरना भूल जाएंगे। तजुर्बा जिंदगी का खत्म होगा मौत पर इस तरह जिएंगे के मरना भूल जाएंगे।
बिखर रहा है किसी नीड़ सा, तिनके- तिनके प्यार । बिखर रहा है किसी नीड़ सा, तिनके- तिनके प्यार ।
झुर्रियां यूं ही पेशानी पे नहीं होगी कई दिन,धूप-छांव ढल चुकी होगी। झुर्रियां यूं ही पेशानी पे नहीं होगी कई दिन,धूप-छांव ढल चुकी होगी।
सन्नाटों की शाम हमारी बस्ती में । लोकतंत्र बदनाम हमारी बस्ती में ।। सन्नाटों की शाम हमारी बस्ती में । लोकतंत्र बदनाम हमारी बस्ती में ।।
पूजन भजन व साधना सत्कार में, क्यों फँसा आराधना विस्तार में ! पूजन भजन व साधना सत्कार में, क्यों फँसा आराधना विस्तार में !
नौकरी कर घर लौटती औरत बेहद थकी होती है. नौकरी कर घर लौटती औरत बेहद थकी होती है.
दौड़ रहे हैं आँख मूँद कर सपनों के पीछे गिद्ध, छडूंदर, घोड़ा, हाथी, चमगादड़, तीतर।। दौड़ रहे हैं आँख मूँद कर सपनों के पीछे गिद्ध, छडूंदर, घोड़ा, हाथी, चमगादड़, ...
कुदरती विरोध प्राकृतिक विपदा कुदरती विपदा प्रकृति पहल हारा प्रकृति विकाश और जीवन कुदरती विरोध प्राकृतिक विपदा कुदरती विपदा प्रकृति पहल हारा प्रकृति विकाश...
जीवन से बड़ी प्रयोगशाला इस दुनिया में और कोई नहीं है। जीवन से बड़ी प्रयोगशाला इस दुनिया में और कोई नहीं है।
राजनीति के दलदल में, घुटने टेक रही है गौ माता। राजनीति के दलदल में, घुटने टेक रही है गौ माता।