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Yukti Nagpal

Romance

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Yukti Nagpal

Romance

गुस्सा

गुस्सा

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पागल नहीं थे जो तेरी परवाह किया करते थे 

कुछ तो राब्ता था तुझसे 

ऐसे ही नहीं तेरे गुस्से को भी हँस के झेला करते थे !

खाना खाया,दवाई ली ,दिन में दस बार पूछा करते थे ,

शायद मोहब्बत होने लगी थी तुमसे ,

ऐसे ही नहीं तेरी सादगी पर मरा करते थे !

तेरी आवाज़ सुनने को तरसते थे ,

पल-पल तेरी परवाह करते थे 

बारिश की बूंदों में भी तेरे आंसू पहचान जाते थे 

और मेरे आंसू को तुम पानी की बूँदें बताया करते थे! 



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