गुरुपूर्णिमा
गुरुपूर्णिमा
गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः,
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।
छोटा या बड़ा वो गुरु ही है जिससे भी हम सीखें,
जिसने भी सिखाया ज़िन्दगी में सीखते चले गये,
माँ ने कहा,बुरे की संगत मत करो तो दूरी बना लिये,
पिता ने कहा,ज़माना ख़राब है तो लोगों से सम्भलने लगे,
आदेशानुसार देर रात में घर से बाहर नहीं निकलते,
कहीं बाहर जाना हो तो माँ बाप से पूछकर जाते,
फ़ोन पर घंटों ना बतिया सिर्फ काम की बात करते,
पापा आने वाले है सखियों से कह फ़ोन रख देते,
शिक्षकों के अलावा अनुभव से सीखते गये बड़े होते-होते,
रोज सीखते वक़्त से भी हालातों के संग झूझते-झूझते,
बच्चों के लिये स्कूल,कॉलेज प्रवेश प्रक्रिया समझने लगे,
नयी पढ़ाई नये कोर्स,नये संभाग, नये विचार समझने लगे,
माँ नौकर को सहायक कहो;बच्चे समझाते हुए कहने लगे,
माँ,पिज़्ज़ा के दो हिस्से रामू भैया को दे दो ताजे-ताजे,
मत दो सहायकों को बासी खाना या पड़ी हुई चीजें,
बीमार हो गये तो अपना इलाज़ भी कहाँ से करवाएंगे,
पानी का प्रवाह कम करो,लाइट बँद क्यों नहीं करते!
फ़ोन चार्ज करने के बाद खटका बँद क्यूँ नहीं किये,
प्रकृति,बच्चे,बड़े हालात वक़्त हमें बहुत कुछ सिखाते,
अफ़सोस की हम उन पर ज़िन्दगी में अमल नहीं करते।।
