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Neeraj pal

Inspirational

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Neeraj pal

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गुरु की सेवा

गुरु की सेवा

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मन की गति है अजब निराली, इत-उत चंचल बन फिरे।

 कभी सदमार्ग पर चलना चाहे, कभी बुद्धि विवेक हरे।।


 तेरे वश में यह नहीं आने वाला, चाहे कितना भी प्रयास करे।

 माया ठगनी, कुमति दायनी, जाने कितने थक कर मरे।।


 वशीकरण मंत्र तू अपना ले, जो दिल से प्रभु को याद करे।

 परसेवा, प्रेमभाव ही ऐसा, सब संकट से जो मुक्त करे।।


 मुक्त ना हो सकेगा तू माया से, जब तक तेरी स्वास चले।

 गुरुमय तुझको बनना होगा, जो हर पल तुझको प्रेम करे।।


थोड़ा समय तू विचार शून्य तो हो जा, ईश्वर वहीं निवास करे।

 श्रद्धा, विश्वास को कम न करना, सकल सृष्टि में वह रमा करे।।


 हृदय निर्मल "साधन" से होगा, जो नित- नित उसका अभ्यास करे।

गुरु से बढ़कर कोई और न दूजा, सब पर सदा ही दया करे।।


 बड़े भाग्य मानुष तन पाया, क्यों कर इसको विफल करे।

"नीरज" कर ले तू "गुरु की सेवा", जो कोटिन सबके पाप हरे।।।.


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