STORYMIRROR

Devendra Singh

Inspirational

4  

Devendra Singh

Inspirational

गुरु-आशीष

गुरु-आशीष

1 min
261

चरण रज आपके गुरुवर

मेरे  माथे  का चंदन है

आप हैं शांति का कानन

धरा बंजर का कृन्दन है


तिमिर अज्ञान का छाया है

जब भी मेरे मस्तक पर

जलाया दीप गुरुवर  नें

मेरी बस एक दस्तक पर


हमें अज्ञान के पथ से

पार ले जाते हैं गुरुवर

कठिन संसार के भव से

तार ले जाते हैं गुरुवर


तुम्हारी शरण मे आया

कृपा कर दो मेरे गुरुवर

हमारे शीश पर अपना

ये कर रख दो मेरे गुरुवर।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational