गुमनाम रिश्ते
गुमनाम रिश्ते
कभी खुदा के फरिश्ते
तो कभी आवाम बन जाते हैं
कभी मुश्किलों के सफर में लड़ कर
मुअक्किल शाम बन जाते हैं।
होते है ऐसे कुछ रिश्ते जो
अनकहे से बन जाते हैं,
दुआ क़ुबूल करके कोई
पहचान बन जाते हैं।
वो होते है कुछ रिश्ते जो
अनकहे से गुमनाम बन जाते हैं।
ये मंज़र ये सफर एक अभिराम रचते हैं,
कभी आंधी तो कभी तूफान बन सकते हैं।
भीड़ की कशिश में कोई राज बन जाते हैं,
कुछ रिश्ते अनकहे से गुमनाम बन जाते हैं।
