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Shaheer Rafi

Classics

4.7  

Shaheer Rafi

Classics

गोविंद का सुमिरण ।

गोविंद का सुमिरण ।

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हे ! मुरली मनोहर, हे ! वासुदेव् नंदन,

हे ! गिरिधर नागर, हे ! दामोदर ।


रास लीला तेरी आनंद दायक,

तू ही है स्वामी गोपियों का नायक ।


हे ! मधुसूदन, हे ! मनमोहन,

हे ! पीताम्बर, हे ! ब्रिजमोहन ।


कैसे करूँ पार संसार के भव सागर को,

पुकारूँ बार - बार मेरे गिरिधर नागर को ।


हे ! श्यामसुंदर, हे ! गोविंद 

हे ! विश्वम्भर, हे ! मुकुंद ।


यंत्रणा मिली है मुझको मोह मुद्गर से,

उद्धार करो ओ माधव माया के सर से ।


हे ! गोपाल, हे ! नंदलाल,

हे ! नारायण, हे ! निरंजन ।


स्तिथप्रज्ञा तुम अंतःकरण में जगाओ,

फिरसे विश्वरूप धर कर्मयोग सिखाओ ।


हे ! वैकुंठनाथ, हे ! जगन्नाथ,

हे ! उपेंद्र, हे ! यादवेंद्र ।


है मानव कालिया नाग कलयुग का,

हे ! बंसीधर अब तुम ही बचाओ ।


हे ! परमपुरुष, हे ! परमात्मा,

हे ! प्रजापति ,हे ! विश्वात्मा ।


उदाहरण दे कर मीराबाई का,

भक्ति ओ उपासना की नींव रखाओ ।


हे ! श्रेष्ठ, हे ! सनातन ।


मुझको सच्चा मार्ग दिखाओ,

भक्त को तुम दो अपने दर्शन,

वैजयंती माला सा विजयी बनाओ ।


              



              








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