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Dr Narendra Kumar Patel

Abstract Romance Others

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Dr Narendra Kumar Patel

Abstract Romance Others

ग़ज़ल

ग़ज़ल

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जब भी क़लम उठाता हूं

यादों में खो जाता हूं


लिखना था इतिहास मुझे

प्रेम ग्रंथ लिख जाता हूं


भूगोल में रहा पी-एच.डी.

जज्बातों में बह जाता हूं


नज़रों की कशिश भरी

लफ़्ज़ों को लिख जाता हूं


लहरें 'साहिल' की मीत हैं

घुन लहरों की गाता हूं।


 


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