STORYMIRROR

Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

4  

Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

ग़ज़ल - सो जाऊं थक के तो

ग़ज़ल - सो जाऊं थक के तो

1 min
262

सो जाऊं थक के तो खुद ही को जगाता हूँ मैं,

खुद ही खुद की पीठ थपथपाता हूँ मैं।


हर गिरावट पे नयी रौशनी पाता हूँ मैं,

खुद से लड़कर खुद को जीता ही जाता हूँ मैं।


ख्वाब आँखों में लिए चलता हूँ तन्हाइयों में,

धूप सहकर भी दिया बन के जलाता हूँ मैं।


कामयाबी से पहले खुद को कामयाब कहता हूँ मैं,

हर कोशिश पर गर्व कर जाता हूँ मैं।


जो भी हासिल हो, मुकद्दर का करम मान लिया,

जो न पाया, उसको तक़दीर बनाता हूँ मैं।


आईना देखूँ तो अपना ही हौसला दिखता है,

हर अंधेरे में चराग़ों को जगाता हूँ मैं।

---++++---


बह्र-ए-मुजारे मुसमन अखरब

रदीफ: "हूँ मैं"

काफिया: -ाता


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational