ग़ज़ल - इस जिंदगी में
ग़ज़ल - इस जिंदगी में
हर चाल पर जमाने की आंखें खुली हुई हैं
बातों का दौर खत्म करके यादें धुली हुई हैं।
कौन से रस्ते चुनें अपने मुकाम पहुंचने को
हर पैमाने में विष की साजिशें घुली हुई हैं।
वो हार कर बैठा हुआ है एक नुक्कड़ पर
उनके मशवरों से खुद की राहें भूली हुई हैं।
दुनियां से रुखसत होने बाद के दस्तूर यहां
कि दावतों में अश्कों से नजरें गीली हुई हैं।
दुनियादारी के कायदों से चल 'सिंधवाल'
ज्यादा पाने की दौड़ में सांस फूली हुई हैं।
