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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Abstract

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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

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गीतिका छंद...

गीतिका छंद...

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(2122 212 2,2122 212)

देव होते हैं वही जो, देखते हैं सत्य ही ।

श्रेष्ठता बिकने लगे हैं,देख लो अब नित्य ही ।।

मौनता अच्छी नहीं है, अब सुधारो तो सही।

राम आए पुण्य होगा,प्रिय पधारो तो सही ।।


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