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Rekha Shukla

Abstract

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Rekha Shukla

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घर लई जईओं

घर लई जईओं

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सावन आयो घर लई जईओ...

थारी प्रित रूलाये एक बुंद बरसाए 

एल डरेआवाज़ छूके चंदा 

तेरी चांदनी दिल जलाये

सुनियो जि अर्ज हमारी गुंजन साझ 

भरे हरे बादलो पे चलने देख, 

पिया सावन रूलाये।


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