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Gopal Agrawal

Inspirational

4  

Gopal Agrawal

Inspirational

घर लौट चलें

घर लौट चलें

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थोड़ा खुली हवा में सफर करें,

घुटन से भरी जिन्दगी की,

मायूसी को दूर करें,

थोड़ा खुली हवा में सफर करें,


महामारी के चलते कहीं जाने की मनाही है,

डर इतना गए, आत्मा ने भी चोट खाई है,

आखिर कब तक हम तिल तिल कर मरे,

हवा पानी बदल जाए ऐसा कुछ करें,

खुला हो आसमान व खुलकर सांस भरें,

थोड़ा खुली हवा में सफर करें,

घुटन से भरी जिन्दगी की,

मायूसी को दूर करें,


परिवार का साथ हो, अपने भी पास हो,

बहुत दुखी हो चुके, अब न मन उदास हो,

कांक्रीट के जंगल से दूर,

न महामारी का वास हो,

चहुंओर बिखरी हरियाली हो,

देखकर मन मे खुशहाली हो,

विपदा के समय में ऐसा कुछ करें,

थोड़ा खुली हवा में सफर करें,

घुटन से भरी जिन्दगी की,

मायूसी को दूर करें,


बहुत रह लिए घर से दूर,

लौटने का अब बनाए टूर,

मन में विश्वास लिए,

जीने की आस लिए,

पत्नी एवं बच्चों संग,

डाॅगी भी साथ लिए,

चल पड़े है डगर पर,

इस सुहाने सफर पर,

घर लौट कर कुछ ऐसा करें,

थोड़ा खुली हवा में सफर करें,

घुटन से भरी जिन्दगी की,

मायूसी को दूर करें।


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