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Dr. A. Zahera

Tragedy Inspirational Others

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Dr. A. Zahera

Tragedy Inspirational Others

घर को लौटा!!

घर को लौटा!!

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सवेरे सवेरे नींद की आगोश से जब आंख खुली

रोज जैसी हवा और वैसी ही धूप थी सुनहली।

चाय की प्याली संग अखबार को जब टटोला

वहां ताजा सुर्खियों और गरम खबरों का कोना मिला।


दिल दहलाने वाला मंज़र तस्वीरों में था लिपटा पड़ा

वक्त कहीं ठहरा हुआ सा पड़ा मिला

आंखों से झरने सी बहती हुईं यादें भी आईं नज़र

यतीमी की चादर से झांकता हुआ बचपन भी दिखा।


पिता के सहारे की दीवार गिरी हुई पड़ी थी

मां की उजड़ी ममता भी पास ही खड़ी दिखी

टूटी चूड़ियां, मिटा हुआ सिंदूर और

सफेद साड़ी में लिपटी हुई बेवा भी दिखी।


चिता की आंच में जब बूढ़ी आंखों ने 

अपने वीर जवान को जलते हुए देखा

जवानी की गोद में पलते नन्हे बचपन को

देश पर शहादत पाने का आशीष दे डाला।


इस कीमती जज्बे को सलाम कर दिल खूब रोया

फिर अपने वतन और उस घर पर रश्क हो आया

मातम नहीं वहां तो जज्बाए शहादत लिए

देशप्रेम में डूबा हुआ एक बहादुर परिवार नज़र आया ।


सुना था मैंने की कल सरहद पर चली थी गोली

उनके दस दस पे अपना एक वीर था भारी 

वतन की आन ओ शान पर कुरबान हो चला

तिरंगे में लिपटा शहीद अपने घर को लौटा।



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