विकास से विनाश तक!!
विकास से विनाश तक!!
इक दिन हुई वन बाशिंदों की मानव पुत्रों संग लड़ाई।दोनों थे इस बात पे आतुर कौन है सबसे शक्तिशाली।
किसी ने कहा भगाओ इनको शोर बहोत मचाते हैं।कोई बोला मारो इनको नाश बहोत ये कर जाते हैं।
तब वनराजा बोला तुम अपने कर्म हम अपने गिनाएं एक दूजे की श्रेष्ठ और अच्छी बातें साबित करवाएं।
मानव बोला पहले हमारी फिर होगी तुम सब की बारी देख उसकी व्याकुलता सब वन जीवों ने भरी हुंकारी।
मानव जाति हैं सबसे श्रेष्ठ इसमें नही मत कोई दूजा जा पहुंचे हम मंगल ग्रह पर करनी होगी हमारी पूजा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और यंत्रमानव के हम हैं जन्मदाता अंतराजाल के तंत्रों से हमने संपूर्ण विश्व को है जोड़ा।
हमने बनाईं लंबी सड़के और गगन को छूती इमारतें सुंदर उपवन शीश महल और जाने कितने देवालय।
बिन मौसम हमने उगाई फसलें, बिन ऋतु के साग पात है हममें इतनी क्षमता की कर दें बिन बादल बरसात।
फिर आगे वो बोले ज़रा अकड़ के बड़े गुरूर में आके हम तो हैं सामाजिक प्राणी आपस में रिश्तों से जुड़ते।
धरती को हम माने मां और समझें बेटी को देवी जैसी पर तुम ठहरे जंगल के वासी तुम में कहां बुद्धि ऐसी।
अपनी बात रखने की जब आई वन बाशिंदों की बारी मानव की उपलब्धि पर उनका हर एक तर्क था भारी।
उसकी हर इक अति के जब खोले सबने राज़ जो गहरे माथे पर दुख के बल और आंखों में आए आंसू मोटे।
अच्छी बात तू मंगल और चंदा के दर तक जा पहुंचा परंतु होती उसकी पूजा तेज ब्रम्हांड मेंं जिसका फैला।
अंतराजाल के तंत्रों से तूने भले ही विश्व को है जोड़ा पर आधुनिकता के मोह में तूने मानवता को है तोड़ा।
तुमने अपनी धरती मां को अपने मतलब से है वेदा भवन मार्ग खूब बनाए और विकास जोशीमठ सरीखा।
वृक्षों वनों और जलमालाओं की बलिवेदी पर न जाने कितने पक्षी कितने पशुओं के छीने तुमने आशियाने।
बिन मौसम जो बोए तूने साग पात फल फूल निराले सृष्टि की सुंदर संरचना के तूने बदल डाले हैं मायने।
बिन चाहे वज्रपात हो या प्रचंड सुनामी और भूचाल तबाही का हर एक रूप है तेरे ही कूकर्मों की सौगात।
कैसे माने हम तेरी महिमा कैसे समझें तुझको आला।देवी रूपी बहन बेटी को तो तूने वाहन के नीचे है रौंदा।
अरेओ मानव मत इतना अकड़ तू होगी तेरी जगहंसाई अकड़ के दम पर बाप का बेटा होगा न भाई का भाई।
हम तो कल भी पशु थे आज और कल भी वही रहेंगे परंतु मानवता को नीचे गिरता देख हम नहीं सकेंगे।
तुझको ऐसी जीत मुबारक जिसमे तूने सबकुछ हारा हम चाहे तू रहे सदैव ऊंचा और करे मानवता की रक्षा।
