थोड़ा सा आसमान चाहिए!!
थोड़ा सा आसमान चाहिए!!
मुझे मेरे सपनों का वो संसार चाहिए।
मकान नहीं छोटा सा इक घर चाहिए।
बनी रहूं सदैव मैं अन्नपूर्णा हे परमात्मा
मुझे तुमसे ऐसा ही एक वरदान चाहिए।
खेलते हों जहां नन्हे पग अधरों पे मुस्कान लिए
मुझे ऐसा प्यारा सा वो एक आंगन चाहिए।
जिस बगिया में सींचता हो भावनाओं के फूल
हे प्रभु मुझे पति रूपी ऐसा बागबान चाहिए।
रहते हों जहां हंसी खुशी हर छोटे बड़े रिश्ते
आदर प्रेम से सराबोर ऐसा खानदान चाहिए।
बहु बेटी मां और पत्नी के चोले में तपकर
मुझे अब खुद अपनी भी पहचान चाहिए।
भर सकूं जहां केवल अपनी आशाओं की उड़ान
भगवान मुझे मेरा वो थोड़ा सा आसमान चाहिए ।
मुझे मेरे सपनों का वो सुंदर संसार चाहिए।
मकान नहीं छोटा सा अपना इक घर चाहिए।
