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Dr. Anu Somayajula

Abstract

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Dr. Anu Somayajula

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घर जिसका ऋणी है

घर जिसका ऋणी है

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घर जिससे ही घर है,

घर जिसके ही बलपर है,

घर जिसका ऋणी है - गृहिणी


छत का आधार है वो,

दीवारों का संबल है,

दरवाजे की चौखट है गृहिणी


आंगन का अलाव है वो,

गर्मियों का छिड़काव है,

देहरी का दीया है गृहिणी


सींचती स्नेह भाव से,

सहज प्रेम भाव से,

रिश्तों की मिठास है गृहिणी


संध्या का दीपक है वो,

भोर का सूरज है वो,

स्वयं प्रकाशमान है गृहिणी


इंद्रियों से बोलती है,

शब्द अपने तोलती है,

मौन में भी मुखर है गृहिणी


खीर क्या, करेला भी-

भासता है रस भरा,

प्रेम की चाशनी है गृहिणी


बिखरने दे ना कभी,

मोतियों को पिरोती,

रेशम की डोर है गृहिणी


सांझ की आस बांधे,

पंछी सारे लौट आएं,

वृक्ष भी , नीड़ भी गृहिणी


अर्धांगिनी है वह,

सहभागिनी है वह,

सहगामिनी है वह गृहिणी


गेह की गरिमा है वह,

मान है, अभिमान है वह

गृह की स्वामिनी है गृहिणी।             


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