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mintu kumar

Abstract


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mintu kumar

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गाँव से शहर

गाँव से शहर

1 min 21 1 min 21

मैं जब चला था गांव से शहर

देखा था नाला से ड्रेन होता हुआ


किसान को देखा था 

आम के पेड़ पर झूला हुआ

जिन हाथों में रोटी के टुकड़े 

और किताब के साथ-साथ 

अक्षर के ज्ञान होने थे


उन हाथों में थे खंजर या

कोई अस्त्र देखा था 

एक विधवा को 

जिसने लगाई थी कभी गुहार

सरकार से अपने खेत बचाने की


मगर सबसे ज्यादा दर्द तो तब हुआ

जब रचयिता रचने लगते है उसके जीवन पर

आधारित कोई कहानी या कविता

और लूट ले जाते है वाह-वाही, धन और सोहरत।


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