STORYMIRROR

Karishma Gupta

Abstract

2  

Karishma Gupta

Abstract

एक उड़ान

एक उड़ान

1 min
253

तोड़ा था जो पत्ता तुमने उस शाख का, 

सुना है शजर में अभी जान बाकी है,


बख़्श दिया तुमने सोच कर ज़ख्मी है परिंदा,

टूटी नहीं उम्मीद उसकी अभी अर्श तक पहुंचने की,


सुना है कि अभी एक उड़ान बाकी।

अभी एक उड़ान बाकी।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract