एक शहीद की माँ
एक शहीद की माँ
वन्दन है शत-शत बार ओ माँ ! तू एक शहीद की माता है !
कांधे पर अर्थी धर सुत की,तूने मातृत्व को साधा है !
ये वो जननी जो साँसें भी,बेटे की खातिर लेती है ।
शोणित की अंतिम बूँदों तक अपने बेटे को सेती है।
कितनी आशा तृष्णा से,था तेरा अंतर झलक रहा।
चाँदी सी दुल्हन का सपना,बेटे की खातिर दमक रहा।
पर हाय ! कलुषित श्वान ने,तेरे सपनों को चूर्ण किया !
सुत तेरा आज हिमालय सा ,तेरी गोदी में मौन किया !
तू पलटी घायल बाघिन सी, आँखें तेरी अंगार बनी !
अश्रु और ममता मौन हुए,तू खुद नंगी तलवार बनी !
बूढे कांटों पर बेटा था,पर तूने सीना तान लिया ..
शत्रु की नब्ज तोड़ने का,व्रत जैसे तूने ठान लिया ।
इतना धीरज ,इतना सम्बल ,माँ ! बोल कहाँ से लेती है?
हाँ ठहर मुझे मालूम हुआ ,तू भारत माँ की बेटी है !
तू भारत माँ की बेटी है ! तू भारत माँ की बेटी है!
