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Pradnya Kulkarni

Abstract

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Pradnya Kulkarni

Abstract

एक प्याली चाय की

एक प्याली चाय की

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एक प्याली चाय की और जिंदगी

जैसे मानो कोई गहरा रिश्ता

पल में दोस्त बना देती है

कुछ तो जादू है इस

एक गरम चाय की प्याली में

रिश्तों में मिठास लाती है

कुछ तो जादू है इस

एक गरम चाय की प्याली में

तुरंत थकान दूर कर देती है

कुछ तो जादू है इस

एक गरम चाय की प्याली में

यादों के रथ का सारथी बन जाती है

कुछ तो जादू है इस

एक गरम चाय की प्याली में

बनकर उड़न खटौला ख्वाबों की दुनिया में ले जाती है

कुछ तो जादू है इस

एक गरम चाय की प्याली में

एक प्याली चाय की और जिंदगी

जैसे मानो कोई गहरा रिश्ता।



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