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संदीप सिंधवाल

Abstract

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संदीप सिंधवाल

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एक प्याला चाय

एक प्याला चाय

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एक प्याला चाय 

करोगे साझा मेरे साथ 

कुछ मीठी यादें शक्कर सी 

कुछ कड़वे तजुर्बे जिंदगी के 

दूध सी सादगी और उसूल

पानी सा निर्मल शीतल प्रवाह 

जो कहीं भी घुलमिल जाय। 


तो साहब 

सिर्फ एक प्याला चाय की बात नहीं 

इसकी चुस्कियां लेते लेते 

कुछ अपनी कहो 

कुछ मेरी सुनो। 


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