STORYMIRROR

Minal Aggarwal

Tragedy

4  

Minal Aggarwal

Tragedy

एक कड़वा फल देता पेड़

एक कड़वा फल देता पेड़

1 min
617

मैं समझती थी 

उसे एक खुशबू से महकता 

फूल

वह तो एक कड़वा फल देता 

पेड़ निकला 

बहुत कसैला है 

बड़ा ही जहरीला है 

बाहरी आवरण है सुंदर 

भीतर से है मैला 

तन सुंदर हो 

मन विषैला

वाणी नीम के पत्तों सी 

कटु और 

व्यवहार हठीला तो 

मधुर सम्बन्धों की 

झिलमिलाती 

रोशनी बिखेरती

लड़ियों का 

कोई बुझे तो 

आखिर कैसे लगेगा 

मेला 

अपमान की मार 

बिना बात 

लगातार 

बार बार 

कोई क्यों खायेगा 

आखिर कितने वार

झेल पायेगा

एक बुझती सी सांसों के

पुलिन्दे का रेला।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy