एक आवाज़ दो
एक आवाज़ दो
प्रेम की बांसुरी होठों से चूम लो,
फूंक दो एक स्वर राग भर जायेंगे।
बिन तुम्हारे रहे हम अधूरे सदा,
एक आवाज़ दो हम निखर जायेंगे।
बीच में अनगिनत अंधेरे रहे,
ख़्वाब टूटे हुए राह घेरे रहे।
लाख़ चाहा अधर पे हँसी हो,
मगर मन में गमों के बसेरे रहे।
हर्फ–दर–हर्फ बिखरे हुए हैं अभी,
एक आवाज़ दो हम संवर जायेंगे।
यदि गगन तुम, बनो मैं सितारा बनू,
यदि नदी तुम बनो, मैं किनारा बनू।
बस यही मांगता चाहता हूं सदा,
तुम मेरी बनो, मैं तुम्हारा बनू।
राह शोलो भरी हो भले ही,
एक आवाज़ दो गुज़र जायेंगे।
ताल झंकृत करो, लय मधुर साज दो,
प्रेम विकसित करो और आवाज़ दो।
युग–युगों से प्रतीक्षित है यह चाहना,
पूर्ण हो एक अवसर उसे आज दो।
लाख़ बंदिश लगाए ज़माना मगर,
एक आवाज़ दो पार कर जाएंगे।
