बेटियां
बेटियां
खुशियों से सारे घर को सजाती है बेटियाँ,
अश्कों को अपने सबसे छुपाती है बेटियाँ।
घर में पहन के चूड़ी नहीं बैठती है अब,
आकाश में जहाज़ उड़ाती है बेटियाँ।
भेजा है जब ख़ुदा ने ही रहमत बना के फिर,
क्यों पेट में ही अक्सर मार दी जाती है बेटियां।
बेटों से ज्यादा नाम वो हर मोड़ पर करे,
अपना हुनर भी ख़ूब दिखाती हैं बेटियाँ।
बेटा पढ़े तो एक ही इन्सान पढ़े मगर,
पूरे ही खानदान को पढ़ाती है बेटियाँ।
दिल में ग़मों के एक समंदर को ले के भी,
जाने कहाँ पे आंसू छुपाती है बेटियॉं।
शम्मा की तरह जल के बुझी और जल उठी,
इस तरह सबको राह दिखाती है बेटियाँ।
