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Piyush Kherajani

Abstract

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Piyush Kherajani

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नया आशिक़

नया आशिक़

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आशिक़ मैं नया नया सा,

तुमसे टूटा फूटा सा इज़हार करने आया हूं।

मुझे ऐसा लगता है की इस दुनियां में,

मैं सिर्फ़ तुमसे प्यार करने आया हूं।


न चांद को घर से उठाऊंगा,

न तारे तोड़ सकता हूं।

लेकिन अगर तू हां कर दे,

तो मैं उम्र भर का रिश्ता जोड़ सकता हूं।


सुकून मिलता है इन आंखों को,

तेरा यह चहरा देखने से।

इन आंखों को दो से,

मैं चार करने आया हूं।


आशिक़ मैं नया सा,

तुमसे टूटा फूटा सा इज़हार करने आया हूं।


तेरे प्यार के बगैर अब,

मेरे दिल की कोई हस्ती थोड़ी है।

तू हां कर चाहे न कर,

तेरे साथ कोई जबरदस्ती थोड़ी है।


मेरी मां को बना के सासू मां तेरी,

नाम तेरे मैं अपना सारा संसार करने आया हूं।


आशिक़ मैं नया सा,

तुमसे टूटा फूटा सा इज़हार करने आया हूं।


तेरे मेरे बीच में न कोई 

गैरों की बातें होंगी।

दुल्हन तो तू ही बनेगी मेरी,

बस फेरों की बातें होंगी।


घर का इकलौता लाडला हूं मैं,

तेरे मां पापा को भी माना लूंगा।

न शराब पीता हूं न है बेल कोई,

पढ़ा लिखा हूं, कुछ न कुछ तो कमा लूंगा।


दिल से निभाने हैं रिश्ते सारे,

मैं नहीं कोई व्यापार करने आया हूं।


आशिक़ मैं नया नया सा,

तुमसे टूटा फूटा सा इज़हार करने आया हूं,

इज़हार करने आया हूं.........!


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