कभी कभी
कभी कभी
सब कुछ लगेगा बेकार कभी कभी,
टूटेगा हौसला मेरे यार कभी कभी।
जिंदगी लगेगी कभी सबसे हसीन,
जीना लगेगा दुश्वार कभी कभी।
पर आसान कोई सफ़र नहीं होता,
उड़ सकता है जिसका पर नहीं होता।
जिंदगी का मतलब चलना नहीं,
हम मुसाफिरों का घर नहीं होता।
कुछ समझ ना आये तो समझ,
क्यों अक्स है दिखता कांच पर।
क्यों उंगलियाँ रुक गयी पाँच पर,
क्यों नींद नहीं आती रात भर।
तेरे सपने हैं बड़े, तुझे सोना नहीं है,
इसे किसी भी कीमत पर खोना नहीं है।
वक़्त करेगा कोशिश तुझे रुलाने की,
तुझे वक़्त को बदलना है, रोना नहीं है।
