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Neeraj pal

Abstract

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Neeraj pal

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दया करो।

दया करो।

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अब तो दया करो हे! कृपा निधान।

तीर्थ कर -कर हार गया मिल ना सका निदान।।


लख चौरासी सजा भुगत तब भी ना आया बाज।

मानुष जन्म यूं ही बीता पहन पाप का ताज।।


सपने देख रात बिताऊँ, दिन भर भरता पेट।

बढ़ -बढ़ कर डींग मारता जैसे धन्ना सेठ।।


कहीं बिखर ना जाए महफ़िल मेरी ,टूट ना जाए सेज।

नम आंखों से यही प्रार्थना, तुम ही मेरे रंगरेज।।


किसके आगे झोली फैलाऊँ, तुम हो गरीब -निवाज।

आन पड़ा हूं दर पर तेरे, पूर्ण कर दो काज।।


भव -सागर में फंसा है "नीरज" करता करुण पुकार।

हे दीनबंधु !दाता मेरे, अब तो राखो लाज हमार।।



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