Binoli Dalal
Drama
तेरी गलती छुपाने वाली बातो से मेरी तन्हाई नहीं भरने वाली,
तेरी मौजूदगी से दिल की दूरी नहीं मिटने वाली,
तेरे छूने से दिल को धड़काने वाला एहसास मिट गया,
एक बार की गलती जिंदगी भर की दूरी कर गई।
फ्री इंडिया
दुरी
प्रकृति , पार्वती , सीता के रूप में आदरांजलि के लिए। प्रकृति , पार्वती , सीता के रूप में आदरांजलि के लिए।
डगमगाने लगा स्वर्ग सिंहासन, गगन मैं दानवों दी किलकारी हैं। डगमगाने लगा स्वर्ग सिंहासन, गगन मैं दानवों दी किलकारी हैं।
एक पार्टी का नेता बोला मैं सरकार से कह कर आपके लिए पक्के मकान बनवा दूंगा। एक पार्टी का नेता बोला मैं सरकार से कह कर आपके लिए पक्के मकान बनवा द...
फासलों को मिटाने के लिए फैसलों पर बात ना करते, अगर वो लोग मेरी जगह होते.. फासलों को मिटाने के लिए फैसलों पर बात ना करते, अगर वो लोग मेरी जगह होते..
एक बार भी उन्हें मैं पहन ना सकी सारे ही तो तुमने अपने हाथों से ही गंगा माँ में समा दिया एक बार भी उन्हें मैं पहन ना सकी सारे ही तो तुमने अपने हाथों से ही गंगा माँ म...
रहिए ना अब ऐसे भरम में मिलेंगे हम अब अगले जनम में रहिए ना अब ऐसे भरम में मिलेंगे हम अब अगले जनम में
अजीब थी वो सर्दी वाली बारिश की रात अजीब थी वो सर्दी वाली बारिश की रात
कान्हा का जन्मदिन है, ओ बड़ी धूम मची ब्रज में। कान्हा का जन्मदिन है, ओ बड़ी धूम मची ब्रज में।
इस ओर हर ओर, मैं देखूं जिस भी ओर, एक उत्सव सा लगता है। इस ओर हर ओर, मैं देखूं जिस भी ओर, एक उत्सव सा लगता है।
बढ़ते रहने का हर सफर जारी रखो... बढ़ते रहने का हर सफर जारी रखो...
संवाद करने भर के लिए स्त्री, क्यों आखिर शब्दावली तलाशती है. संवाद करने भर के लिए स्त्री, क्यों आखिर शब्दावली तलाशती है.
भीतर से आवाज आना हो गई बंद है प्रकाश पर आज लगे हुए तम कलंक है भीतर से आवाज आना हो गई बंद है प्रकाश पर आज लगे हुए तम कलंक है
किसी की न कीजिए तलाश अब रुक जाइए करिये आराम बस ! किसी की न कीजिए तलाश अब रुक जाइए करिये आराम बस !
खुद्दारी के दामन में उनका ही दम घुटता है। जो चापलूसी से सांसो का रिश्ता रखता है। खुद्दारी के दामन में उनका ही दम घुटता है। जो चापलूसी से सांसो का रिश्ता रखता ...
धन, अनाज धातु उगाने का हुनर मुझे याद अब भी है। धन, अनाज धातु उगाने का हुनर मुझे याद अब भी है।
बिन मेरे भले ना दिन ढले, मैं लौट के अब ना आऊँगा। बिन मेरे भले ना दिन ढले, मैं लौट के अब ना आऊँगा।
माँ आज भी चूल्हे पर बैठी गुड़ की चाय बना रही है माँ आज भी चूल्हे पर बैठी गुड़ की चाय बना रही है
ना ही एक दूसरे की इच्छाओं की प्राथमिकता ना ही एक दूसरे पर अधिकार ना ही एक दूसरे की इच्छाओं की प्राथमिकता ना ही एक दूसरे पर अधिकार
प्यार में हमेशा कोई न कोई पागलपन होता है, परन्तु साथ ही हमेशा पागलपन में कुछ कारण भी प्यार में हमेशा कोई न कोई पागलपन होता है, परन्तु साथ ही हमेशा पागलपन में कुछ...
मुझे माफ करना जो तुमको रुलाया कभी भूले से तेरा दिल जो दुखाया मुझे माफ करना जो तुमको रुलाया कभी भूले से तेरा दिल जो दुखाया