Binoli Dalal
Drama
तेरी गलती छुपाने वाली बातो से मेरी तन्हाई नहीं भरने वाली,
तेरी मौजूदगी से दिल की दूरी नहीं मिटने वाली,
तेरे छूने से दिल को धड़काने वाला एहसास मिट गया,
एक बार की गलती जिंदगी भर की दूरी कर गई।
फ्री इंडिया
दुरी
इस कदर तन्हा हूँ कि अपनी बातें खुद को ही बताता रहता हूँ। इस कदर तन्हा हूँ कि अपनी बातें खुद को ही बताता रहता हूँ।
बुद्धि-ज्ञान, आशा-निराशा के संग वो लड़ते जाएं।। बुद्धि-ज्ञान, आशा-निराशा के संग वो लड़ते जाएं।।
कहीं बाधा ना बन जाए तुम्हारे कर्तव्य के लिए ये बे-वक़्त निकली कोई भी बात कहीं बाधा ना बन जाए तुम्हारे कर्तव्य के लिए ये बे-वक़्त निकली कोई भी बात
जो लोग मुझसे रिश्ते निभाएंगे मैं उन पर पूरे दिल से मोहब्बत लुटाऊँगा। जो लोग मुझसे रिश्ते निभाएंगे मैं उन पर पूरे दिल से मोहब्बत लुटाऊँगा।
लड़ना-झगड़ना, शिकायतें करना अठखेलियाँ कर फिर तुझे चिढ़ाने लड़ना-झगड़ना, शिकायतें करना अठखेलियाँ कर फिर तुझे चिढ़ाने
अनंत की राह में। चिंतन की चाह में। अनंत की राह में। चिंतन की चाह में।
जो दिखे छोटे, पर याद दिला दे, नानी हिंदी हृदय से निकली हुई है, वाणी जो दिखे छोटे, पर याद दिला दे, नानी हिंदी हृदय से निकली हुई है, वाणी
अक्सर शादी के मायने को शर्मिंदा करते हैं। अक्सर शादी के मायने को शर्मिंदा करते हैं।
क्या बात है कि मैं जोरों से हँसकर अपनी पीड़ा को न सुलझाऊँ। क्या बात है कि मैं जोरों से हँसकर अपनी पीड़ा को न सुलझाऊँ।
बहुत चालाकी से अपना मुँह फेर लेते हो । बहुत चालाकी से अपना मुँह फेर लेते हो ।
समाज की हकीकत बयाँ करती एक कविता...! समाज की हकीकत बयाँ करती एक कविता...!
दिल के अरमानों का, खून किया है फिर एक बार । दिल के अरमानों का, खून किया है फिर एक बार ।
जो लाश भेजी थी क़ासिद की भेजते ख़त भी रसीद वो तो मिरे ख़त की थी जवाब न था। जो लाश भेजी थी क़ासिद की भेजते ख़त भी रसीद वो तो मिरे ख़त की थी जवाब न था।
'बदतर' अभिनय करते पकड़े जाते हैं...! 'बदतर' अभिनय करते पकड़े जाते हैं...!
सूखे सावन में, तन वस्त्र भी लगता, भार सूखे सावन में, तन वस्त्र भी लगता, भार
ये मीठा-मीठा ज़हर है, ये नशे सा सर चढ़ कर बोले ये मीठा-मीठा ज़हर है, ये नशे सा सर चढ़ कर बोले
साथ मे चाय के साथ दो कश लगाने दोगी क्या ? साथ मे चाय के साथ दो कश लगाने दोगी क्या ?
मां बचपन में सुनाती, जिसमें कहानी हिंदी ही थी वो मां सदृश्य जैसी वाणी मां बचपन में सुनाती, जिसमें कहानी हिंदी ही थी वो मां सदृश्य जैसी वाणी
भाई उसे बहुत परेशान करता था, पर मन-ही-मन बहुत प्यार भी करता था। भाई उसे बहुत परेशान करता था, पर मन-ही-मन बहुत प्यार भी करता था।
उसके लिये सर्दी, गर्मी, वर्षा सब ही एकसार है।। उसके लिये सर्दी, गर्मी, वर्षा सब ही एकसार है।।