STORYMIRROR

Sakshi Jain

Fantasy

4  

Sakshi Jain

Fantasy

दुनिया

दुनिया

1 min
230

बदल जाते है लोग 

ढल जाता है दिन 

थम जाता है पल 

सँवर जाता है जीवन


मुस्कुरा जाता है चेहरा 

धड़क जाता है दिल 

हिल जाता है जहान

गरज जाते है बादल


बरस जाती है बूंदे 

खिल उठा है आसमान 

महक जाते है फूल 

चहक जाते है पंछिया 


बढ़ चुकी है ख्वाइशें

उड़ चुकी है उमंगें 

मिल जय गर ये आज़ादी 

घूम सकूँ पूरी दुनिया 

घूम सकूँ पूरी दुनिया।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy