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Sakshi Jain

Classics

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Sakshi Jain

Classics

वो तुम ही हो

वो तुम ही हो

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बिन मौसम बरसात हो तुम 

बिन देखे ख्वाब हो तुम 

बिन चाही चाहत हो तुम 

बिन मांगी ख्वाइश हो तुम 


बिन बोले लब्ज़ हो तुम 

बिन कहे अरमान हो तुम 

बिन रूठे मनाते हो तुम 

बिन ताज कोहिनूर हो तुम 


बिन आँसू खिलखिलाते हो तुम 

बिन कही पहेली हो तुम 

बिन दिखे आईना हो तुम 

हाँ वो तुम ही हो 

हाँ वो तुम ही हो।


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