SWETA RANI
Abstract
दुख की परिभाषा
सबने अपने हिसाब से लिखी।
पर क्या कोई लिख पाया है
असल दु:ख ।
दु:ख क्या है?
काश...
या आस
जब कोई तुम्हें अपना
दुःख सुनाए
तो उसे अपने दुःख से
मत मापना ।
सबने अपने अपने हिस्से के
दुःख ढोए हैं।
दु:ख
उदासी
स्त्री
जिंदगी : संघर...
एक बाल मजदूर ...
सागर कुछ कहना चाहता है सागर दिल हल्का करना चाहता है। सागर कुछ कहना चाहता है सागर दिल हल्का करना चाहता है।
तेरे हर कार्य पर निर्भर करता है भारत माता के संतानों की उनकी दीनता से मुक्ति। तेरे हर कार्य पर निर्भर करता है भारत माता के संतानों की उनकी दीनता से मुक्ति।
झूठ पर परम सत्य का लेबल है परम सत्य सन्यास के अनुक्रम में झूठ पर परम सत्य का लेबल है परम सत्य सन्यास के अनुक्रम में
लेकिन सच का साथ न छोड़ें, चाहे हो जाएं मोहताज। लेकिन सच का साथ न छोड़ें, चाहे हो जाएं मोहताज।
फिर देखना, वो समय भी आएगा, तुम्हारे जीवन में, सबको एक धुन, सुनाई देगी, फिर देखना, वो समय भी आएगा, तुम्हारे जीवन में, सबको एक धुन, सुनाई देग...
पेट भरता है जो हम सबका, किसान वही कहलाता है। पेट भरता है जो हम सबका, किसान वही कहलाता है।
रंग है ये मानवता का और सब पर चढा हुआ है। रंग है ये मानवता का और सब पर चढा हुआ है।
क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें
कल्पना की सीढ़ी बनाकर रात भर ---इस- चमचमाती रात के साये में, कल्पना की सीढ़ी बनाकर रात भर ---इस- चमचमाती रात के साये में,
बिन मेहनत के बैठ के खाते, जीवन भर कुछ ना कर पाते। बिन मेहनत के बैठ के खाते, जीवन भर कुछ ना कर पाते।
क्या ढूंढ रहे हो, जब कुछ खोया ही नहीं। क्या ढूंढ रहे हो, जब कुछ खोया ही नहीं।
तेरा सफ़र यादगार बहुत है, तुझे किसी का इन्तजार बहुत है। तेरा सफ़र यादगार बहुत है, तुझे किसी का इन्तजार बहुत है।
स्थिर नहीं हूं चलायमान हूं मैं पारदर्शिता कर्मप्रधान हूं मैं वक्त हूं। स्थिर नहीं हूं चलायमान हूं मैं पारदर्शिता कर्मप्रधान हूं मैं वक्त ह...
जाग मुसाफिर , सूरज कभी किसी के लिए थमा नही किसी के लिए लौटा कभी कोई लम्हा नही। जाग मुसाफिर , सूरज कभी किसी के लिए थमा नही किसी के लिए लौटा कभी कोई लम्हा नह...
मिलन है परमात्मा से किस बात का शोध मिलन है परमात्मा से किस बात का शोध
आज थोड़ी मेहनत कर लो, कल अच्छा होगा, आज थोड़ी मेहनत कर लो, कल अच्छा होगा,
राधा कृष्ण के रूप माधुर्य का रसपान किया है मैंने राधा कृष्ण के रूप माधुर्य का रसपान किया है मैंने
आँखों से खेले ये, दिल का चमके तारा, दिल का हाल पूछाँ, तो तारा चमका तुटा, आँखों से खेले ये, दिल का चमके तारा, दिल का हाल पूछाँ, तो तारा चमका त...
इश्क़ की धुंध में भटक कर गलत रहा ना पकड़ना। इश्क़ की धुंध में भटक कर गलत रहा ना पकड़ना।
उस भीड़ का क्या? जो हमें देखने को इकट्ठा हो, उस भीड़ का क्या? जो हमें देखने को इकट्ठा हो,