STORYMIRROR

हरीश सेठी 'झिलमिल'

Inspirational

5.0  

हरीश सेठी 'झिलमिल'

Inspirational

दर्प

दर्प

1 min
346


खरगोश को दर्प था

बहुत ज्यादा

तभी तो

रास्ता तय कर पाया था

आधा।


कछुए को नहीं था दर्प

किया प्रयास

देर से ही सही,

मंजिल थी

उसके पास।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational